संदेश

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जीवन बेला सुवास सुरभित  दुर्दम में भी जिजीविषा अदम्य  शुष्क उछाहों में सदैव  अपनी मृदुल भावना से पूरित  प्रसारित करता  भीनी - भीनी

ओ कृष्ण प्यारे

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ओ  कृष्ण  प्यारे  गोकुल  के  ग्वाले  नंददुलारे  बंसी  बजाओ ,  छायी  निराशा  सोई   निस्तब्धता  अब  पल प्रतिपल  घनेरी  दीप   आशा   का   फिर   मन -  मंदिर   में   जलाओ । मनप्राण   खोए    हुए   है  ,  अवरुध्द   जीवन  गति -  लय विकसे   कमल  ,   कमलनयन   क्यों   अदृश्य

कान्हा मनमोहना बंसी बजाए

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कान्हा   मनमोहना  बंसी  बजाए  ...  मनमोहना  बंसी  बजाए  मन  की  प्रीत  साची , समीरण  में  मिल  शीतलता कान्हा  बंसी  का  स्वर  गूँजे - गूँजे  रहे - रहकर

अखंड अमर सौभाग्य सिंदूर

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बेअटके सवालों में खो गए उत्तर सख्त दीवारों में घड़ी की टकटक खामोशी को ओर भी रह - रहकर  गंभीर गहन बनाए  कौन खाली बाँस को इस योग्य बनाए  कौन फिर एक बार बंसी मीठी बजाए