जय श्री राधा राधा ।।

 श्री राधा राधा ।। श्री राधा कृष्णाय नमः ।। 🙏🙏


नमस्कार 🙏 श्रीराधाकृष्ण के कमलचरणों का ध्यान करते हुए हम अपने आज के इस लेख की शुरुआत करते है भगवान का ध्यान हममें एक सकरात्मक ऊर्जा को जागृत करता है जो किसी भी कार्य को पूरी निष्ठा के साथ प्रतिपादन कर उसे अमल तक पहुँचाने में प्रारंभ से अंत तक साथ देता है ।

क्योंकि हरिनाम ही सहारा है जो सदैव आपके साथ आपका सारथी बनकर आपको सही मार्ग दिखाता है । मात - पिता , गुरु , बंधु , सखा और प्रिय सब गुण उसमें समाहित है बिना किसी स्वार्थ के जीवन की हर सम - विषम परिस्थिति में सदैव आपके साथ ही रहता है आपके सबके निकटस्थ होकर । वक्त कैसा भी क्यों न हो आपके साथ आपका संबल आपको पीछे से सँभालने वाला पग - पग का साथी आपका हरि सदैव साथ रहेगा । भरोसा विश्वास वो चीज है जो पत्थर में भी हरिरुप निहार लेता है । 


जो दुःख है हरि ने कुछ सोच- समझकर दिया है जैसे आग में तपकर स्वर्ण निखरता है वैसे ही प्रभु मुश्किलों में हमें विचलित न होकर हर चीज का दृढ़ता से सामना करना सीखाते है हमें भीतर से मजबूत करते है और हाँ जिसके पास स्वयं श्रीकृष्ण हो उसको भला कोई हरा सकता है चाहे जितनी बड़ी मुश्किल हो शत्रुओं का घेरा हो सबके सब राह से अपने - आप छँटते जाते है क्योंकि ये बस एक डर जगाते है और हमारे हरि हमारे कृष्ण हमारे राम शिवशुंभ की मुस्कान हर डर से निडर कर देती है । उनका स्मरणमात्र ही आनंद और शक्ति का संचार करने वाला कल्याणकारी परम सुख को देनेवाला है । प्रभु का ध्यान सदैव बना रहे उनकी याद सदा बनी रहे इससे अधिक भक्त को कुछ नहीं चाहिए । भक्त - भगवान के इस रिश्ते का वर्णन करना बस की बात नही केवल मन - ही- मन अनुभूत किया जाता है और यहीं अनुभूति हमारी शक्ति बनती है हर मुश्किल हर चुनौती से मुखर होकर सामना करना सीखाती है । चैतन्य के इस विराटभाव का साथ हरेक जीव के साथ है बस उस पर भरोसा करना है । जय श्री राधे - राधे ।। जय श्री कृष्णा ।।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अखंड अमर सौभाग्य सिंदूर

ओ कृष्ण प्यारे

शरद पूर्णिमा का चाँद

वही कृष्ण कहलाता

मेरे मन तुम राधे - राधे जपा करो