क्यों साँवरों ?



जब शब्द  हारे

कुछ  कहना  न  जाने

मुख  बोल  न  कभी  पहचाने

तुम  तब  भी  समझ  लेते

मेरी  सारी  बातें

ओ  कृष्ण  क्या  मेरा  मौन 

तुम्हारी  बंशी   का   गीत  है

जिसको   तुम   ही   जानो - पहचानो 

क्यों  साँवरों  ?

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